एक बार धीर कहे संत वीर से |
की हे संत क्या हो,अगर हर मनुष्य को हो एक पूँछ ?
"संत- वीर" पड़े सोच में -हर मनुष्य को हो एक पूँछ |
फिर संत बोले की -हे धीर इस धरती पे ऐसा संभव हो जाएगा |
हर मनुष्य एक पूँछ पा के अपने आप को stylo कहलवायेगा ||
उन् पूंछो के होंगे कई प्रकार और सभी के होंगे अपने आकार |
किसी के पास होगी tiger पूँछ तो किसी के पास बकरी पूँछ |
कोई होगा हाँथी पूँछ का मालिक तो कोई बिल्ली पूँछ से होगा सम्मानित ||
पूंछो की होगी अपनी style , हर मनुष्य की होगी पूंछो वाली smile ||
हर पूंछो के होंगे salient features और हर feature define many creature |
जैसे अगर मनुष्य है खुश तो उसकी पूँछ george w. bush |
अगर मनुष्य है रुष्ट तो उसकी पूँछ ओसामा जैसे दुष्ट ||
और अगर मनुष्य है प्रेम में तो उसकी पूँछ होगी दिल के shape में |
और अगर मनुष्य है प्रेम वियोग में तो तीर भी होगा दिल के frame में ||
पूँछ पुराण सुन धीर हुआ चकित ,उसका मन पूंछो के लिए हुआ व्यथित,
और वह बोला हे संत ये कैसा है अत्याचार पूंछो का बिना वस्त्रो के ही किया प्रचार
"संत-वीर" हुए क्रोध से लाल ,और बोले हे मुर्ख shut up your 'मुह',
first let me define everything नहीं तो क्या एक slap मुह पे दूं .
फिर "संत-वीर" बोले सुनो धीर -
पूंछो का होंगा अपना सम्मान वस्त्रो का भी होगा इसमें योगदान |
पूंछो के लिए भी होंगी अनेक designer,बड़े - बड़े retail stores और उनके पूछ shows ||
पूंछो के लिए भी बनेंगी dresses |
everything should b stylish अब चाहे वो short हो या latest |
पूंछो के लिए बनेंगी बड़े -बड़े saloon in which every पूँछ will b totally groomed ||
पुरषों की पूंछो का बालो की होंगी अपनी style उसी के basis पे होगी उनकी पूरी personality clarify |
जैसे रौबदार पुरुष की पूँछ होग- रौबदार, उसके बाल होंगे लम्बे लच्छेदार |
romantic मिजाज वाले पुरुष की पूँछ होंगी-romantic उसके बाल होंगे soft और seductive |
उल्लू पुरुष की पूँछ भी उल्लू अब बाल के लिए क्या कहू जैसे घुंघराले घुंघरू ||
स्त्रियों की पूँछ के तो क्या कहने ,उनके लिए होंगे diamond और सोने के गहने |
इनकी पूंछो के लिए होंगे अलग से dressing table जिसमे होंगे पूँछ liner,maskaara और कई cosmetic-label |
स्त्रियाँ पूंछो की waxing करवाएंगी और उसे दिखाने का लिए short पूँछ dress पहिन इतरायेंगी ||
इतनी व्याख्या के बाद संत हुए शांत और वीर को कुछ सोचते देख उनके चेहरे पे आई मुस्कान,
फिर वो बोले हे वीर मत हो इस दिखावे की पूँछ-शान के कदरदान ,
ये तो सिर्फ छलावा है पूंछो से भी भला क्या कोई style स्तातेमेंट बन पाया है,
पूँछ तो है बस जानवरों की पहचान और तुम हो एक इंसान .
तो कृपया आप सभी पाठक भी न मुस्कुराए और अपनी -अपनी ख्याली- पूँछ को ख्यालो से उडाये .
धीर - तो बोलो "संत-वीर" की जय ....
की हे संत क्या हो,अगर हर मनुष्य को हो एक पूँछ ?
"संत- वीर" पड़े सोच में -हर मनुष्य को हो एक पूँछ |
फिर संत बोले की -हे धीर इस धरती पे ऐसा संभव हो जाएगा |
हर मनुष्य एक पूँछ पा के अपने आप को stylo कहलवायेगा ||
उन् पूंछो के होंगे कई प्रकार और सभी के होंगे अपने आकार |
किसी के पास होगी tiger पूँछ तो किसी के पास बकरी पूँछ |
कोई होगा हाँथी पूँछ का मालिक तो कोई बिल्ली पूँछ से होगा सम्मानित ||
पूंछो की होगी अपनी style , हर मनुष्य की होगी पूंछो वाली smile ||
हर पूंछो के होंगे salient features और हर feature define many creature |
जैसे अगर मनुष्य है खुश तो उसकी पूँछ george w. bush |
अगर मनुष्य है रुष्ट तो उसकी पूँछ ओसामा जैसे दुष्ट ||
और अगर मनुष्य है प्रेम में तो उसकी पूँछ होगी दिल के shape में |
और अगर मनुष्य है प्रेम वियोग में तो तीर भी होगा दिल के frame में ||
पूँछ पुराण सुन धीर हुआ चकित ,उसका मन पूंछो के लिए हुआ व्यथित,
और वह बोला हे संत ये कैसा है अत्याचार पूंछो का बिना वस्त्रो के ही किया प्रचार
"संत-वीर" हुए क्रोध से लाल ,और बोले हे मुर्ख shut up your 'मुह',
first let me define everything नहीं तो क्या एक slap मुह पे दूं .
फिर "संत-वीर" बोले सुनो धीर -
पूंछो का होंगा अपना सम्मान वस्त्रो का भी होगा इसमें योगदान |
पूंछो के लिए भी होंगी अनेक designer,बड़े - बड़े retail stores और उनके पूछ shows ||
पूंछो के लिए भी बनेंगी dresses |
everything should b stylish अब चाहे वो short हो या latest |
पूंछो के लिए बनेंगी बड़े -बड़े saloon in which every पूँछ will b totally groomed ||
पुरषों की पूंछो का बालो की होंगी अपनी style उसी के basis पे होगी उनकी पूरी personality clarify |
जैसे रौबदार पुरुष की पूँछ होग- रौबदार, उसके बाल होंगे लम्बे लच्छेदार |
romantic मिजाज वाले पुरुष की पूँछ होंगी-romantic उसके बाल होंगे soft और seductive |
उल्लू पुरुष की पूँछ भी उल्लू अब बाल के लिए क्या कहू जैसे घुंघराले घुंघरू ||
स्त्रियों की पूँछ के तो क्या कहने ,उनके लिए होंगे diamond और सोने के गहने |
इनकी पूंछो के लिए होंगे अलग से dressing table जिसमे होंगे पूँछ liner,maskaara और कई cosmetic-label |
स्त्रियाँ पूंछो की waxing करवाएंगी और उसे दिखाने का लिए short पूँछ dress पहिन इतरायेंगी ||
इतनी व्याख्या के बाद संत हुए शांत और वीर को कुछ सोचते देख उनके चेहरे पे आई मुस्कान,
फिर वो बोले हे वीर मत हो इस दिखावे की पूँछ-शान के कदरदान ,
ये तो सिर्फ छलावा है पूंछो से भी भला क्या कोई style स्तातेमेंट बन पाया है,
पूँछ तो है बस जानवरों की पहचान और तुम हो एक इंसान .
तो कृपया आप सभी पाठक भी न मुस्कुराए और अपनी -अपनी ख्याली- पूँछ को ख्यालो से उडाये .
धीर - तो बोलो "संत-वीर" की जय ....
arey kuch likha bhi to karo bhai..
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